• गजल

    यो मनभित्र  आंधी चलेकै छ|
    उनको यादले मन जलेकै छ|

    भन्न केहि सक्दिन कसैलाई,
    मनभरी पिरको आगो बलेकै छ|

    कहांबाट भेट भयो आज हाम्रो,
    समिपमै यी आँखाहरु छलेकै छ|

     जब उनको आनाकानी बुझ्दै गएँ,
    बेहोसीमा नै मन मेरो धलेकै छ|





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